Tuesday, October 27, 2026
लद्दाख मे हाईकोर्ट बेच शुरु
अधिवक्ता की हत्या पर अधिवक्ताओ का प्रदर्शन
अधिवक्ता हत्याकांड के आरोपितों की गिरफ्तारी की मांग
कोर्ट जा रहे अधिवक्ता की हत्या
व्यवहार न्यायालय कर्मचारी 7 को मनाएंगे ब्लैक डे
गांधी जयंती पर आज रिहा होंगे 44 बुजुर्ग बंदी
जमुई बार एसोसिएशन ने लिया बड़ा फैसला
पटना सिविल कोर्ट को फिर मिली बम से उड़ाने की धमकी
सुप्रीम कोर्ट के फैसले आसान हिंदी मे सुन और पढ़ सकेंगे
जयपुर। परदेश की अदालतों की ओर से जारी होने वाली न्यायिक और प्रशासनिक आदेश में अब जाती का उल्लेख नहीं होगा। राजस्थान उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जरनल ने इस संबंध में आदेश जारी किया है।आदेश में न्यायाधीश एसपी शर्मा के ४जुलाई २०१८ को बिशन बनाम सरकार के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया गया है। बिशन को न्यायालय से जमानत मिली थी लेकिन दस्तावेज में जाती मेव लिखने में आ गई जबकि बिशन की जाति जाटव थी।इस कारण उसे जेल में ५दिन अतिरिक्त रहना पड़ा था।मामला उच्च न्यायालय पहुंचा तो न्यायाधीश एसपी शर्मा ने नाराजगी जताते हुए आदेश दिया था।इसमें जाति के उल्लेख को संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री, अधीनस्थ अदालतों को अपने आदेश और पुलिस की गिरफ्तारी में जाति का उल्लेख नहीं करने के निर्देश दिए गए थे।इस आदेश के लगभग २१महीने बाद उच्च न्यायालय प्रशासन ने सोमवार को देर रात प्रशासनिक आदेश जारी किया। Lawkhabar की टीम की ओर से आप सभी से निवेदन है कि लॉकडाउन का पालन करें सोशल डिस्टेंस बनाकर रखें सावधानी बरतें।